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CAA को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 6 दिसंबर को अगली सुनवाई

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CAA को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 6 दिसंबर को अगली सुनवाई

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Supreme Court On CAA: सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी. कोर्ट ने सोमवार (31 अक्टूबर) को दो वकीलों को सभी याचिकाओं में उठाए गए मुख्य मसलों का संग्रह तैयार करने का ज़िम्मा दिया. मामले में 232 याचिकाएं हैं. इनमें से 53 असम और त्रिपुरा से जुड़ी हैं. कोर्ट साफ कर चुका है कि उन्हें बाकी मामलों से अलग से सुना जाएगा.

देश के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ ने मामले को 6 दिसंबर को एक उपयुक्त पीठ के समक्ष आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट कर दिया है. रविवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सीएए को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की अपील की थी. इससे पहले बीते 12 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सैकड़ों याचिकाओं की छंटनी करने और जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया था.

संशोधन की हुई थी कड़ी आलोचना

साल 2019 में संशोधित सीएए कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदाय के गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रयास करता है, जो साल 2014 तक देश में आए हैं. मुस्लिमों के बहिष्कार को लेकर विपक्षी दलों, नेताओं और अन्य संस्थाओं द्वारा कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है. इस मुद्दे पर मुख्य याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दायर की थी.

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गृह मंत्रालय ने दायर किया 150 पेज का हलफनामा

दूसरी ओर, अदालत में केंद्रीय गृह मंत्रालय के दायर 150 पेज के हलफनामे में कहा कि संसद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 245(1) में प्रदत्त अधिकारों के तहत संपूर्ण भारत या उसके किसी हिस्से के लिए कानून बनाने में सक्षम है. गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुमंत सिंह के दायर हलफनामे में याचिकाओं को खारिज करने की अपील की गई है.

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